Who Killed My Son…….?

Reality Faced by Students – Disclosed An earnest undertaking to figure out which of the factors enumerated herewith squeezed life from MY SON HIS/HER STATUS to NO STATUS” SYSTEM? Part-I The premise on which the transformative years of a child ought to be founded turns the arduous journey of the child-major stepping stone for future to a rhetoric and the pivot on …

Connected Souls – LIBRATED

…ney subah subah kitna rula diya …… I read the whole writing of urs on that FB page ………kindly add me as well. Now let me put my heart in front of you ……… U remember wen i visited India in 2014 and met Richie in your office ….he said 1 or 2 such sentences that took me to flashback for an …

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Father’s Diary – Part 8

सुरंग के अंत में रौशनी ये संसार कितना सुन्दर है, किन्तु हमने जीवन में क्लिष्टता भर दी हैं कि केवल परस्पर विरोधी संभावनाएं ही आरम्भ में दृष्टि में आती है हम उठने की चेष्टा ही नहीं कर पाते और पूर्व में ही लडखडा जाते है | हम अपने आस-पास अनेक युवाओ को देखते है जिनके जीवन में सबकुछ अनुकूल है …

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Father’s Diary – Part 6

“ठीक बुझने से पहले लौ तेज़ हो जाती है|” तुम्हारी माँ ने कंप्यूटर चलाना सीख लिया है और एप्पल के सेवा विभाग में वो खुद गयी थी तुम्हारे कंप्यूटर के दस्तावेज पुनः प्राप्त करवाने क्योंकि इतने दिन बंद रहने की वजह से सिस्टम क्रेश हो गया था | अब तुम्हारी माँ तुम्हारे सारे उपकरण-आई-फ़ोन,आई-पेड,आई-५-जिन्हें वो किसी और को हाथ लगाने …

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Father’s Diary – Part 5

“अलविदा,.” जैसे अर्जुन के पास सबकुछ था, वासुदेव थे, शब्दवेधी बाण विद्या थी किन्तु अभिमन्यु की मृत्यु को वो रोक नहीं पाए क्योंकि सारे शगुन उस दिन विपरीत थे,ऐसे ही जो भी शक्ति उस दिन तुम्हे वह प्रलयंकारी कदम उठाने से रोक सकती थी, सृष्टि ने अनुपस्थित कर दी | चक्रव्यूह में प्रवेश करना केवल अभिमन्यु को मालूम था, संसार …

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Father’s Diary – Part 4

अलविदा के पूर्व : हमें मानव जीवन परिपूर्णता प्राप्त करने के लिए मिलता है,तुममें वाकई ये पूर्णता विद्यमान थी,तुम हर कार्य सर्वोत्तम तरीके से करते थे भले ही समय और संसाधन का आधिक्य हो जाए लेकिन बाद में जो परिणाम उभरकर आता वो अद्वितीय होता जो तुम्हारे प्रयास के खिलाफ हमारे हर तर्क को विफल कर देता | शेक्सपियर पर …

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Father’s Diary – Part 3

समाज जब किसी चट्टान पर अनेक प्रहार किये जाते है, लेकिन वह विक्षिप्त सौवे प्रहारपर होती है, इसका अर्थ ये नहीं कि सौवे प्रहार ने उसे तोडा है अपितु यह है कि निन्यानवे प्रहारों ने उसे कमजोर किये है | समाज हबी व्यक्ति के ह्रास में इन अपरिलक्षित प्रहारों कि भूमिका निभाता है | लोगो का एहसान फरामोश रुख भी …

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Father’s Diary – Part 2

व्यवस्था सर्वप्रथम मृगतृष्णा की भांति वर्त्तमान शिक्षप्रनाली ने लुभावने प्रलोभन देकर अपनी ओर आकृष्ट किया जो वास्तव में विद्यमान ही नहीं थे | वर्त्तमान समय का सबसे विनाशकारी प्रभाव ये है की आजकल सबकुछ मिथ्या प्रदर्शन पर आधारित है | सांच के आवरण में न जाने कितने कपट के धंधे ढक जाते है | इस आडम्बर के नक़्शे में पहले …