Father’s Diary – Part 2

व्यवस्था

सर्वप्रथम मृगतृष्णा की भांति वर्त्तमान शिक्षप्रनाली ने लुभावने प्रलोभन देकर अपनी ओर आकृष्ट किया जो वास्तव में विद्यमान ही नहीं थे | वर्त्तमान समय का सबसे विनाशकारी प्रभाव ये है की आजकल सबकुछ मिथ्या प्रदर्शन पर आधारित है | सांच के आवरण में न जाने कितने कपट के धंधे ढक जाते है | इस आडम्बर के नक़्शे में पहले बचपन का ह्रास होता है, फिर किशोरावस्था, फिर युवावस्था का अकल्पनीय क्षय होता है |

तुम्हे तो आरंभ से ही संसार के वर्त्तमान गलत प्रचलन का शिकार होना पड़ा | शिशु तो बिलकुल निर्मल होता है किन्तु हम उसे ठीक तरह से जीवनयापन के लिए तैयार नहीं करते | शुरुआत से ही तुमपर दबाव डाले गए | तुम्हारी शिक्षा से ये क्रम शुरू हो गया | शिक्षा का अर्थ है- ज्ञान ग्रहण करना और शिक्षक का दायित्व उसे प्रदान करना |

आधुनिक शिक्षप्रनाली को इतना जटिल बना दिया गया है की शिक्षक अधिकतर तो मजबूरी के कारन इस क्षेत्र में आते है | डॉ ऐ.पी.जे. अब्दुल कलम जैसे बिरले ही है जिनका ज्ञान प्रदान करना जूनून था | अगर शिक्षक स्त्री हो तो छात्र के लिए वो माँ का रूप होती है पर वो अपनी गृहस्ती और विद्यालय की अन्य औप्चारिक्तायो में ही अपना सर्वस्व दे चुकी होती है, छात्र को शिक्षा देने के लिए कुछ शेष नहीं रहता |

फिर भी मेरे बच्चे, शिक्षको के प्रति तुम्हारा आदर आदर्श है | बालकाल में एक बार तुम्हारे शिक्षक ने तुमपर आघात कर दिए जिस वजह से तुम्हारी पीठ पर निशान भी पड़ गया था (क्योंकि तुम ध्यान की कक्षा में चित्र बना रहे थे ) तुम्हारी माँ उस शिक्षक की शिकायत प्रधान आचार्य से करने हेतु आतुर थी पर तुमने आचार्यो के प्रति सद्भाव के कारन उसे रोक लिया |

इश्वर ने मुझे यहाँ दूसरो के आंसू पोंछने के लिए भेजा है- इसी सन्दर्भ में तुमने मुझसे गुज़ारिश किये कि मै इश्वर से तुम्हारे एक शिक्षक की संतान प्राप्ति के लिए आग्रह करूँ | तुम्हारी कार्यसिद्धि के कुछ माहोपरांत उन्हें संतान की प्राप्ति हुई | तुम जहा कही भी रहते, प्रत्येक शिक्षक-दिवस पर पाने घनिष्ठ शिक्षको को कृतज्ञता का प्रतीक अवश्य भेजते | स्कूल के तुम्हारे टीचर्स कहते थे की कोई और स्टूडेंट तुम्हारी तरह स्कूल से निकलने के बाद कभी उनसे मिला तक नहीं, शुभकामनाए देना तो दूर | तुम्हारे जाने के बाद पहले शिक्षक दिवस पर उन्हें तुम्हारी कमी बहुत खली | मेरा दिल दर्द-मिश्रित गर्व से भर आया जब तुम्हारे बिना शिक्षक दिवस को अधूरा करार दिया |

वर्त्तमान शिक्षा प्रणाली और मार्किट डिमांड के बीच बहुत ज्यादा असमानता है | ज़्यादातर विश्वविद्यालय ऐसे स्नातको को ला रहे है जो व्यवसाय के क्षेत्र में उतरने योग्य है ही नहीं | लेकिन मेरे पुत्र होने के कारन तुम्हे व्यवसाय की कुशलता विरासत में मिली | मैंने जब तुन्हारे लिए व्यवसाय के विस्तार के लिए सम्बंधित लोगो से तुम्हे मिलाया तो वे तभी तुम्हारे इस गुण से प्रभावित हुए लेकिन तुम उनकी मंशा समझ गए और मुझे समझाते रहे की मै व्यावसायिक निर्णय दिल से नहीं बल्कि दिमाग से लूँ |

तुम्हे व्यवसाय की इतनी विकसित सूझ-बूझ थी जिससे प्रभावित होकर मै तुम्हे तुम्हारे सपनो का ऑफिस तुम्हारे जन्मदिन पर गिफ्ट करने वाला था लेकिन मै उस उत्साह में इश्वर की अन्य योजनाओ का अनुमान नहीं लगा पाया | तुम २२ तारीख को इस धरती पर आए, २२ तारीख को जीवन के २२ वर्ष पूर्ण कर २२ तारीख को दुनियावालो के लिए चले गए |

माता-पिता जब अपनी संतान को दूसरो से परिचित कराते है तो नर्सरी की कविता बुलवाते है | तुम श्रीमद्भागवतगीता के श्लोक कहते थे | तीसरी कक्षा में तुम्हे हमने संस्क्रती विद्यालय में पढाया ताकि तुम अपनी संस्कृति से जुड़े रहो | तुम्हे याद है, एक बार गणित के प्रश्नपत्र में दजन शब्द का प्रयोग हुआ जिसका तुम्हे अर्थ नहीं पता था, इस कारन से और वर्त्तमान युग की आवश्यक्तायो को देखते हुए, शिक्षा के आरंभिक वर्षो में संस्कृत विद्यालय से निकालकर तुम्हे शहर के सर्वोत्तम अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय में दाखिल कराया गया |

तुम आरम्भ से ही अत्यंत कुशाग्र रहे हो | अत्यंत शीघ्रता से एवं विषयो में अच्छी पकड़ के साथ तुम न केवल कक्षा में अपितु विद्यालय में सर्वश्रेष्ठ छात्र बनके उभरे और नए कीर्तिमान स्थापित किये | आरंभिक सफलताये आत्मविश्वास बढाने आवश्यक सीढियां बनती है | तुम्हारे ग्रीन ब्लेजर से ब्लू और फिर लगातार सात साल तक स्कूल में अव्वल होने पर रेड ब्लेजर तक का सफ़र, और फिर प्रदेश में भी वोही स्थान बरकरार रखना अपने-आप में अजूबा है | तुम्हारे शिक्षक तुमसे कहते थे की अन्य छात्रों के लिए भी कुछ पुरूस्कार छोड़ दिया करो | तुमने स्पेनिश भाषा में सामान्यतः ६ माह में सीखी जाती है, ३ माह में सीख लिए जिसपर तुम्हे शिक्षक बोले की तुम वाकई अनमोल हो |

विद्यालय की आरंभिक शिक्षा के बाद, तुम नवीन उत्साह से ओने सामर्थ्य को साकार करने के उद्देश्य से संघर्षो से जुड़ने के लिए सांसारिक मैदान में कूद गए | किन्तु चूंकि तुम अत्यधिक भावुक हो, तुमने उन अवसरों को अस्वीकृत कर दिए जो उन्नति के दृष्टिकोण से अच्छे थे पर घर से दूर थे, क्यूंकि तुम माँ के पास रहना चाहते थे |

याद है, तुम लगभग पांच वर्ष के थे, एक बार तुम्हारी माँ बेहोश हो गयी थी, तुमने उसे होश में वापस लेन के लिए उसके चेहरे पर पानी का छिडकाव किया, सामान्य होने के बाद तुमसे पुछा गया तुम्हे ये युक्ति कैसे मालूम है, तब तुमने उत्तर दिया कि ये प्रक्रिया टी.व्ही. पर नायक को नायिका पर आजमाते हुए तुमने देखी है | स्कूल से निकलकर तुम खुदको सिद्ध करने के लिए उमंग से परिपूर्ण थे लेकिन तुमने अपनी माँ के साथ रहने के लिए, दूर के टॉप ऑफर्स अस्वीकार कर दिए |

महत्वाकांक्षा युवावस्था की पहचान है अतः तुम आसानी से ही इन संस्थानों के झूठे प्रोत्साहन में आ गये | और क्यों न आते- इस इंस्टिट्यूट ने ऐसी पद्धति अपनाई जिसके द्वारा इसने यहाँ-वहां से विवरण चुराकर अपना इतना उत्कृष्ठ चित्रण प्रस्तुत किया जिससे ऐसा प्रतीत हुआ मानो ये वास्तविक है और तुमने ही नहीं बल्कि हमने भी इस पर यकीन कर लिया | बड़ो का दृष्टिकोण अक्सर समय की दौड़ में धुंधला जाता है, और फिर सुपरिचित पीढ़ी के अंतराल ने तुमको असमंजस में डाल दिया | तुमने परस्पर विरोधी विकल्पों के चुनाव में वही निर्णय लिया जिसमे घर के बड़ो की सहमती और समय की मांग का समन्वय था |

वस्तुस्तिथि से जब तुम वाकिफ हुए तब तक तुम्हारे नज़रिए मे बहुत देर हो चुकी थी | तब तुम्हारी ऐसी दशा हुई जैसे उड़न तश्तरी से तुम अचानक बेवजह बैलगाड़ी पर आ गये हो | प्रदर्शन और यथार्थ के मध्य इस विशाल अंतर को तुम स्वीकार नहीं कर पाए और इतने वर्षो का संघर्ष, हमारा विश्वास तथा अर्थ का भारी निवेश तुम्हारे प्रानोत्सर्जन के लिए कारन बन गया |

मेरे प्रिय, वास्तव में वर्तमान व्यवस्था इतनी दूषित है कि इस तलब में कोई भी मछली अछूती नहीं रह सकती | कहने का तात्पर्य है की इस प्रणाली के कुचक्र का सिलसिला व्यक्ति को बुराई के मार्ग पर चलने के लिए मजबूर कर देता है और जो अपने उसूलो पे कायम रहना चाहते है उनके लिए जीना दुःसाध्य हो जाता है | उनके मार्ग पर इतनी कठिनाईय आती है कि वाकई जीवनयापन प्रश्न बन जाता है | अगर कोई परिवर्तन लाने कि कोशिश करे, तो वह उस प्रक्रिया में अपना सर्वस्व खो देता है जिसे मैंने खोया है |

यह व्यवस्था निचले स्तर से उच्च स्तर तक फैली हुई है | भ्रष्टाचार इसके मूल में स्थित है | प्रचलित शासन के अनुसार अधिकारी अपनी सुविधानुसार नियम बदल देते है | जो व्यक्ति संस्था को अधक रिशवत प्रस्तुत करता है उसे उच्च स्थान मिलता है और योग्य व्यक्ति को रिशवत प्राप्त होती है | फलों को कृत्रिम साधनों से परिपक्व बनाते है | इसी प्रकार मौजूदा तंत्र हर अवसर का एन-केन प्रकारेण पूँजी के रूप में लाभ उठाने कि शीघ्रता में समाज की नीव को ही क्षति पहुँचाने में कसर नहीं छोड़ती |

जब व्यक्ति को योग्यता से अधिक अर्थ को प्राप्ति हो जाती है जब वह सबसे सुरक्षित क्षेत्र अर्थात सुरक्षा के क्षेत्र में उस धन का निवेश करता है तथा इस जीवन-निर्माण के श्रेष्ठ कार्य का व्यवसाय बना देता है | सावन के अंधे को हर ओर हरियाली ही दिखती है ऐसे ही इन व्यापारियों को केवल अपनी दौलत के विस्तार की मंशा रहती है – किसी के जीवन अथवा भावनाओं से इनका कोई प्रयोजन नहीं |

इन व्यापारियों को विद्या के सम्बन्ध में कोई समझ नहीं होती क्योंकि वो अपने पूर्ववर्ती जीवन में जिस क्षेत्र में स्थित थे उसका शिक्षा से कोई वास्ता नहीं था | इसके अतिरिक्त शासन की गलत नीतियों के कारण इन संस्थानों के आवरण में ढकोसलो को स्वीकृति भी मिल जाती है | सूचना प्रचार के माध्यमों में अतिशय वृद्धि की बदौलत आधुनिक शिक्षण संस्थान अक्सर उन रियायतों का प्रदर्शन करते है जिनका उनमे सर्वथा अभाव है | वे अंधी प्रतिस्पर्धा में मानवीय संवेदना से खेल जाती है |

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