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By Ved Rathore
#2750
Hello sir...
I want to say that last exam was not as good as I was expected...and now preparing for the next one which is on 6 jan.
Feeling tensed because this one is tuff subject..
Be with me..
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By manoo
#2751
NOTHING IN THIS WORLD IS ....TOUGH...PROVIDED U R SOFT....
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By Garisha
#2752
विनम्रता का पाठ पढ़ाने मैं आपकी कुछ इस प्रकार कृतज्ञ हूँ

एक बार नदी को अपने पानी के प्रचण्ड वेग पर घमण्ड हो गया . नदी को लगा कि मुझमें इतनी तीकत है कि मैं पहाड़, मकान, पेड़ , पशु- मानव आदि सभी को बहाकर अपने साथ बहाकर ले जा सकती हूं.
नदी ने बड़े ही गर्विेले अभिमान पर्वक शब्दों में समुद्र से कहा- ताओ , तुम्हारे लिये क्या लाऊं? जो तुम चाहो मै उसे समूल ला सकती हूं.

समुद्र समझ गया कि नदी को अहंकार हो गया है. उसने नदी से कहा- तुम मेरे लिये यदि कुछ लाना ही चाहती हो तो थोडी़ सी घास उखाडकर ले आओ. समुद्र की बात सुनकर नदी ने कहा बस इतनी सी बात , अभी आपकी सेवा नें हाजिर करती हूं.

नदी ने अपना पुरा वेग घास को उखाड़ने के लिये लगाया, पर घास नहीं उखडी.
नदी ने हार नहीं मानी, और अपने सम्पूर्ण वेग से घास को समूल उखाड़ने का पूरा व बार- बार प्रयास किया.
तेज से तेज, प्रचंड प्रवाह के समय घास झुक जाती. और नदी का पूरा वेग घास के झुक जाने के कारण कुछ भी उखाड़ पाने में पूरी तरह असफल रहा.और पूरी तरह असफल होकर नदी थक- हार कर पुन: समुद्र के पास पहुंची. व हाथ जोड़ कर बोली- मैने पूरे प्रचन्ड वेग से घास को उखाड़ने में अपनी पूरी शक्ति लगादी.और घॉस हरबार झुक कर उखड़ने से बच जाती है.
मैं हार गई हूं|
नदी की बात पर समुद्र ने मंद मुस्कुराहट के साथ नदी की बात का जवाब दिया- क्योंकि घास जानती है कि झुकने की शक्ति , किसी भी अन्य शक्ति से कहीं अधिक शक्तिशाली है.... जो अपने सामने झुकता है, उसकी विनम्रता के सामने सब कोई हार जाते है
God's gift

KHUSH RAHO..

Pranam and charansparsh

AISE HI SEEKHONGE....

PROUD TO BE AN INDIAN..

ENJOY BEING...........H...O...L.....Y.....

ONLY WHEN U LOOK AT THE VOLCANO..... U KNOW ABOUT […]