Refueling Life Experiences

मैंने अपनी जिंदगी का दूसरा पहर यही से शुरू किया जब पहली बार १९ जून २०१२ को गुरुदेव की शरण मे आया, प्रथम प्रवेश पर ही मेरे मन मे इक अजीब सी शांति का आभास हुआ था, तब मैं शायद इस जगह से पूरी तरह वाक़िफ़ नहीं था पर जल्द ही आभास हुआ कि मैं बिल्कुल सही स्थान पर हूँ! वक्त के साथ सब बदल गया भैया से अजीब सा लगाव हो गया चाह कर भी मै आपका साथ छोड़ कर जाना नही चाहता था, आपने मुझे बहुत समझाया था पर शायद मैंने नही माना, पर कोई बात नहीं भैया इक सबक मिल गया, आज भी याद है जब आपने मेरी बेहतरीन जिंदगी के लिए हल्की सी डाँट लगाई थी और मेरी आँखों मे आँसू थे, तब भी आप ही मेरे साथ थे, मैंने आपके यहाँ बहुत कुछ सिखा बहुत तरह के लोगों को जाना, पर आपके इशारे को ना समझा आपने कहा था अब तेरा काम खत्म अब तू हट जा पर मैंने मजाक समझा उसके परिणामस्वरूप मेरी पूरी जिंदगी बर्बाद हो गई! खैर मैंने इक नवीन शुरूआत की है, अपनी छोटी बहन की शादी कर रहा हूँ, आशीर्वाद दीजिए सब कुशलता से हो और समाज के ऐसे लोगों को इक सबक मिल जाए! जो सोचते है पैसे से सब बिकता है और सब छुपता है! मेरे मन मे ना द्वेष है नहीं घृणा पर कहीं न कहीं इक टीस है उन जैसे तुच्छ सोच वालों के लिए!
मैं सदैव आपके पथ पर चलुगाँ पर सबकी सुनूगा नही, सब स्वार्थ सिद्ध करने के लिए किसी का कुछ भी कर सकते है, घडियाली आँसू के अंबार भी मैंने देखे है आपके दर पर कैसे लोग आते है और कार्य पश्चात पलट कर भी नहीं देखते! मेरी जिंदगी का वो हसीन पल था जब मैं आपके साथ था, पर आपने अलग कर दिया और मै संभाल नही पाया सब कुछ मेरा बर्बाद हो गया, इक नई सुबह मे शुरूआत की है, सब कुशलता पूर्व सफल हो आशीष रखना आप!

मेरे मन की कुंठा थी जो मैंने निकाल दी मेरी हर गलतियाँ के लिए कोटि कोटि माफी माँगता हूँ, अबोध बालक समझ कर माफ कर देना! अपनी कृपा सदैव मुझपर रखना !

:- आपका छात्र