SOYA BHAGYA

Hike, Climb, Adventure, Mountain, Travel, Nature

सोया भाग्य

एक व्यक्ति
जीवन से हर प्रकार से निराश था.

लोग उसे
मनहूस के नाम से बुलाते थे.

एक ज्ञानी पंडित ने
उसे बताया कि तेरा भाग्य फलाँ पर्वत पर सोया हुआ है,

तू उसे जाकर जगा ले
तो भाग्य तेरे साथ हो जाएगा.

बस ! फिर क्या था…
वो चल पड़ा अपना सोया भाग्य जगाने.

रास्ते में जंगल पड़ा
तो एक शेर उसे खाने को लपका.

वो बोला
भाई…!
मुझे मत खाओ,
मैं अपना सोया भाग्य जगाने जा रहा हूँ.

शेर ने कहा कि तुम्हारा भाग्य जाग जाये तो मेरी एक समस्या है,
उसका समाधान पूछते लाना.

मेरी समस्या ये है
कि मैं कितना भी खाऊँ … मेरा पेट भरता ही नहीं है,

हर समय पेट भूख की ज्वाला से जलता रहता है.

मनहूस ने कहा– ठीक है..!

आगे जाने पर
एक किसान के घर उसने रात बिताई.

बातों बातों में पता चलने पर कि वो अपना सोया भाग्य जगाने जा रहा है,

किसान ने कहा
कि मेरा भी एक सवाल है ..

अपने भाग्य से पूछकर उसका समाधान लेते आना …

मेरे खेत में,
मैं कितनी भी मेहनत कर लूँ…
पैदावार अच्छी होती ही नहीं.

मेरी एक
विवाह योग्य कन्या है,
उसका विवाह इन परिस्थितियों में मैं कैसे कर पाऊंगा…?

मनहूस बोला — ठीक है..!

और आगे जाने पर
वो एक राजा के घर मेहमान बना.

रात्रि-भोज के उपरान्त राजा ने ये जानने पर कि वो अपने भाग्य को जगाने जा रहा है,

उससे कहा कि
मेरी परेशानी का हल भी अपने भाग्य से पूछते आना.

मेरी परेशानी ये है
कि कितनी भी समझदारी से राज्य चलाऊँ,
मेरे राज्य में अराजकता का बोलबाला ही बना रहता है.

मनहूस ने उससे भी कहा — ठीक है…!

अब वो
पर्वत के पास पहुँच चुका था.

वहाँ पर उसने अपने सोये भाग्य को झिंझोड़ कर जगाया —

उठो ! उठो !
मैं तुम्हें जगाने आया हूँ…!

उसके भाग्य ने
एक अँगडाई ली और उसके साथ चल दिया.

उसका भाग्य बोला —
अब मैं तुम्हारे साथ हरदम रहूँगा.

अब वो
मनहूस न रह गया था
बल्कि भाग्यशाली व्यक्ति बन गया था और अपने भाग्य की बदौलत वो सारे सवालों के जवाब जानता था.

वापसी की यात्रा में
वो उसी राजा का मेहमान बना और राजा की परेशानी का हल बताते हुए वो बोला —
चूँकि तुम एक स्त्री हो
और पुरुष वेश में रहकर राज–काज सँभालती हो, इसीलिए राज्य में अराजकता का बोलबाला है.

तुम किसी
योग्य पुरुष के साथ विवाह कर लो,
दोनों मिलकर
राज्य-भार सम्भालो तो तुम्हारे राज्य में शान्ति स्थापित हो जाएगी.

रानी बोली —
तुम्हीं मुझ से ब्याह
कर लो और यहीं रह जाओ.

भाग्यशाली बन चुका वो मनहूस इन्कार करते हुए बोला —
नहीं.. !नहीं.. !
मेरा तो भाग्य जाग चुका है.
तुम किसी
और से विवाह कर लो.

तब रानी ने
अपने मंत्री से विवाह किया और सुखपूर्वक राज्य चलाने लगी.

कुछ दिन
राजकीय मेहमान बनने के बाद उसने वहाँ से विदा ली.

चलते चलते
वो किसान के घर पहुँचा और उसके सवाल के जवाब में बताया कि तुम्हारे खेत में सात कलश हीरे जवाहरात के गड़े हैं,

उस खजाने को निकाल लेने पर तुम्हारी जमीन उपजाऊ हो जाएगी और उस धन से तुम अपनी बेटी का ब्याह भी धूमधाम से कर सकोगे.

किसान ने
अनुग्रहीत होते हुए उससे कहा कि मैं तुम्हारा शुक्रगुजार हूँ,
तुम ही मेरी बेटी के साथ ब्याह कर लो,
पर भाग्यशाली बन चुका वह व्यक्ति बोला कि
नहीं..!नहीं..!
मेरा तो भाग्योदय हो चुका है,
तुम कहीं और अपनी सुन्दर कन्या का विवाह करो.

किसान ने
उचित वर देखकर अपनी कन्या का विवाह किया और सुखपूर्वक रहने लगा.

कुछ दिन
किसान की मेहमाननवाजी भोगने के बाद वो जंगल में पहुँचा और शेर से उसकी समस्या के समाधानस्वरूप कहा कि यदि तुम किसी बड़े मूर्ख को खा लोगे तो तुम्हारी ये क्षुधा शान्त हो जाएगी.

शेर ने उसकी
बड़ी आवभगत की और यात्रा का पूरा हाल जाना.

सारी बातें
पता चलने के बाद
शेर ने कहा कि भाग्योदय होने के बाद इतने अच्छे और बड़े दो मौके गँवाने वाले ऐ मनुष्य…!
तुझसे बड़ा मूर्ख
भला और कौन होगा…?

तुझे खाकर ही
मेरी भूख शान्त होगी
और इस तरह वो व्यक्ति शेर का शिकार बनकर मृत्यु को प्राप्त हुआ.

सच है —
यदि
आप के पास
सही मौका परखने का विवेक और अवसर का उपयोग कर लेने का ज्ञान नहीं है, तो भाग्य भी आपके साथ आकर आपका कुछ भला नहीं कर सकता.